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Monday, July 20, 2009

उन्मुक्त गगन के नीचे

मानसून लेट आया है
पर एहसास नया ये लाया है,
कानून में सुधार आया है
देश में अब बदलाव आया है|
लड़के को लड़की न खोजनी
ना लड़की को लड़का,
कोई भी मिल जाये, चलेग|
बस भिडे प्रेम का टांका |
शायद अब किसी घर में
मूंछों वाली भाभी आएँगी,
कन्यायें कन्या को भी अब
जीजू जीजू बूलाएंगी|
उन्मुक्त गगन के नीचे केवल
अब जोड़े ना रास रचाएंगे,
बदल बदला होगा मंजर
लड़के जब लड़का पटायेंगे|
पुलिस के पास भी अब शायद
छेड़छाड़ के केसेज बढ़ जायेंगे,
महिला महिला को छेड़ेगी
पुरुष पुरुष से छेड़े जायेंगे |
हर सिक्के के पहलू दो होते
कुछ सुधार तो आयेंगे,
ये नए बदलाव देश को
जनसँख्या विस्फोट से बचायेंगे
NAGNDER NEGI
from
Dainik Jagran Dehra Dun